जो ख़्याल करे वो नादाँ है, जो रखे वो है दीवाना


डूब आपकी यादों में, खुद आशिक़ बड़ा समझ बैठे ।
जो ख़्याल करे वो नादाँ है, जो रखे वो है दीवाना ।।

हम आँखें डाल निगाहों में मस्ती के ख़्वाब संजोते थे ।
जो सपने दे उसका क्या पता, अंख खोले वो है मस्ताना ।।

प्यार में पागल होकर के हम भूख प्यास भी भूल गए।
अगले की प्यास भी याद रहे तब ही है असली पगलाना ।।

1-xmgqasqxglfntmvhxcj8sqपेंसिल से लकीरें काग़ज़ पे, बनना आसां, मिटना आसां।
जेहन पे इबारत छप जाए, बेशक है इश्क़ का पैमाना ।।

हम तुक को मिला कर तोहफों के जज़्बात बढ़ाया करते थे ।
इक शेर-शज़र, वो नज़्म-नज़र ही असली मेरा नज़राना ।।

जो ख़्याल करे वो नादाँ है, जो रखे वो है दीवाना ।।

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बतकहा


कभी दो बातें निकलीं औ’ कभी इक काफिला निकला
जो मन में था कभी बन के वो पूरा सिलसिला निकला।

वही दुनिया जो खुद मसरूफ थी बातें न सुनती थी
उसी की दास्ताँ कहने को दिल ये मनचला निकला।

कहूँ किससे सुनूँ किसकी, लबों को किसकी मैं ध्याऊँ
कहीं कोई बतकही निकले जहाँ मैं बतकहा निकला।

गर कोई नहीं तो मैं भी कहाँ?


वो मान भी क्या, अपमान भी क्या
जो औरों के मुख से फूटे ?
पीयूष-सुधा का पान भी क्या
जब अपने ही हमसे छूटे ?
People may respect you or not
A matter not to be sought.
Only the loved ones do matter
Without them, Elixir! go rot.

किसकी खातिर छाती फाड़े
इस कपि का कोई राम नहीं ?
पतझड़ हारे पत्थर मारे
जब लैला का ही नाम नहीं ?
For whom should my heart I rip
If there is no one to pray to ?
Flowers of spring, stones sting
If not a beloved then cares who ?

वो प्राण आत्मा कारण क्या
जब धारण किया शरीर नहीं ?
उस ईश्वर का ही साधन क्या
किसी उर में उसकी पीर नहीं ?
The only truth, the eternal soul
De-bodied, will it achieve the Goal?
The Almighty, The Ultimate Aim
Will I exist, if they cease to claim?

बेवजह


बेवजह नाराजगी, और बेवजह की दिल्लगी,
बेवजह की कातिलाना आदतें अपनी नहीं।

दिल-आइना


हमने उनके सामने जो रख दिया दिल-आइना,
एक पल को भी कभी उनकी हंसी मुरझाई ना .

लग सिरहाने ख्वाब में चाहा उतरना जब कभी
करवटें बदलीं या वो लेने लगीं अँगड़ाईयाँ.

सामने वो बैठ कर जब बाल बाँधा करती हैं
काश इक pin-hole होता ये अदद दिल-आइना.

हमें याद है


उनका बातें बनाना हमें याद है,
हाथों को यूँ नचाना हमें याद है।
मुश्किलों से हँसाना हमें याद है,
रूलाना, मनाना हमें याद है।
उनको किस्से सुनाना हमें याद है,
उनके किस्से बनाना हमें याद है।

उनकी मर्जी है हमको भुला दें मगर,
उनके सपनों में जाना हमें याद है।

some more विद्रोही दोहे


  1. निंदक नियरे राखिए, gossip की भरमार ।
    आपकी निंदा ‘गर करे, media में परचार ।।‌
  2. रहिमन पानी छोड़िए, सर्दी आ गई खूब |
    लहू भी पानी बन गया, डूब गए मंसूब ||
    (मंसूब = मंसूबे)
    Rahim! forget the water, for that season has waned
    Intentions have drowned and the blood’s drained!In response to:
    रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
    पानी गए न उबरे, मोती, मानुस, चून।
  3. ‘बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय’
    कबिरा एसिड डाल के कोई सूर बना गया तोय.
  4. कबिरा खड़ा बजार में, मांगे सबकी खैर.
    ‘no parking’ में भी भइया, तुडवा बैठा पैर..
    तुडवा बैठा पैर तो अब मिल गई है अच्छी सीख.
    खैर मांगने चला था बुडबक मांग रहा अब भीख!
  5. गुरु गोविन्द दोऊ खड़े, काहे लागूं पांय?
    आपस में ही लड़ मरें, ऐसा करूँ उपाय.

एक था कुत्ता


एक था कुत्ता,
बारिश में हुई गीली लकड़ी पर उगा कुकुरमुत्ता |
लेकिन खुद को समझता writer-उल-इब्नेबतुत्ता |

जब भी कहीं जाता,
couples को देख हँसता-बतियाता
जलता भुनता पछताता |
सोचता बाकी कुत्तों जैसी गुर्राहट वाले package में वो क्यों नहीं आता?

फिर एक दिन उसे एक कुतिया मिली |
थोड़ी दूर तक उसके साथ चली |
वो खूबसूरत सी परी,
दूर ही सही पर रही खड़ी |
जिसको केवल उससे ही बात करने की पड़ी |
पूरे डगर
में रहा वो दीन-दुनिया से बेखबर |
जैसे White House के बाहर से अंदर तक का हो सफर |

आज फिर couple-y कुत्तों को देखता है,
आज फिर couple-y कुत्तों को देखता है,
पर अब एक स्नेहिल सी मुस्कान फेंकता है.

काल सफेदा


काल सफेदा, सफेदा, काल सफेदा!
ब्रेन में छेदा हाँ छेदा ब्रेन को छेदा
मन भंवर में कैसे फंस गया
शक-सांप लो इसको डंस गया
अब समझ ना आये, न आये,
सूझ पड़े ना, पड़े ना, उलझा हाए,
कि रंग कौन सा बस गया?

बिन लोटे का पेंदा, हाँ पेंदा
लोटे का पेंदा.
पेंदे से पानी गिर गया
बादल का दामन चिर गया
अब ओले बरसें, हाँ बरसें
कभी रुकें न, रुकें न, तनिक न तरसें
पेंदे में गड्ढा कर गया!

भरम कुरेदा, कुरेदा
भरम कुरेदा.
लकड़ी डाली थी जल गई
उड़ राख आँख में चल गई
जलन है मचती, है मचती
दीख पड़े ना, पड़े ना, उंगली धंसती
कि बूँदें गाल से ढल गईं!

 The illusion appears to bulge out from the picture but actually all the squares inside are perfect and straight squares.

तनहाइयों की परछाइयाँ


मेरी उम्मीदों की बढ्ती सी घटती सी परछाइयाँ।
ख्वाबों की सिमटी सी चुप-चुप उमड़ती सी रूबाइयाँ।
आसों की खिड़की जो खोली,
तो जीवन की प्यारी रंगोली
से तूफानों ने खेली होली ;
ताने लगाते हैं बोली।
उनकी खिलखिलाहटों से घुटती सी लुटती सी तनहाइयाँ ||

दुनिया में खुशियों के लाखों हजारों से मौके हैं।
उनके गुजरने पे हम भी यहाँ चौंके – चौंके हैं।
खुशियों को कैसे संजोएँ ?
दुःख में हम कैसे ना रोएँ ?
उम्मीदों को कैसे छोड़ें ?
आसों की गर्दन मरोड़ें !
भुला दें, मिटा दें, सुनें ना लुभाती वो शहनाइयाँ ?